लोकसभा में 17 अप्रैल 2026 को प्रस्तुत नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संविधान 131 वां संशोधन विधेयक) आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं कर सका, जिसके चलते यह बहुप्रतीक्षित विधेयक पारित नहीं हो पाया। मतदान के दौरान 298 सांसदों ने बिल के समर्थन में मतदान किया, लेकिन विपक्षी दलों, विशेषकर INDI गठबंधन के विरोध के कारण यह संवैधानिक संशोधन विधेयक गिर गया। इस घटनाक्रम के बाद देशभर में राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और महिलाओं से जुड़े संगठनों में भी नाराजगी का माहौल देखा जा रहा है।
इस विषय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजसमंद विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पारित नहीं होना देश की मातृशक्ति के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और काला दिवस है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिलाओं को राजनीति और नीति निर्माण में उचित प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था, लेकिन विपक्ष ने इसका विरोध कर यह साबित कर दिया कि वह महिलाओं के सशक्तिकरण के पक्ष में नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं लंबे समय से राजनीति में अधिक भागीदारी और अवसरों की अपेक्षा कर रही थीं। यह अधिनियम महिलाओं को लोकतंत्र में मजबूत स्थान दिलाने वाला था तथा संसद और विधानसभाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करता। लेकिन विपक्ष ने संकीर्ण राजनीतिक सोच के कारण इस महत्वपूर्ण अवसर को बाधित कर दिया।
विधायक माहेश्वरी ने कहा कि विपक्ष नहीं चाहता कि महिलाओं को नेतृत्व के अवसर मिलें और वे राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएं। महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की बात करने वाला विपक्ष जब इस प्रकार के विधेयक का विरोध करता है, तो उसकी कथनी और करनी का अंतर स्पष्ट दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार लगातार महिलाओं के उत्थान, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिला स्वावलंबन योजनाएं, स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा तथा महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने जैसे अनेक कदम सरकार द्वारा उठाए गए हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी उसी श्रृंखला का एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम था।
दीप्ति किरण माहेश्वरी ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल इस विधेयक का ही नहीं, बल्कि हर उस निर्णय का विरोध करता है जो देशहित, जनहित और समाज हित में होता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सकारात्मक राजनीति के बजाय केवल विरोध की राजनीति में लगा हुआ है। इससे साफ है कि विपक्ष को महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण से कोई सरोकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को गिराने का कार्य विपक्ष ने किया है, लेकिन देश की नारी शक्ति इसका करारा जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी। देश की महिलाएं जागरूक हैं और वे यह भली भांति समझती हैं कि कौन उनके अधिकारों और सम्मान के लिए कार्य कर रहा है तथा कौन केवल राजनीतिक स्वार्थ में बाधाएं खड़ी कर रहा है।
विधायक माहेश्वरी ने विश्वास जताया कि देश की महिलाएं आने वाले समय में और अधिक संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आगे आएंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय नारी सदैव परिवर्तन, संस्कार और शक्ति की प्रतीक रही है। यदि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों पर कुठाराघात होगा तो देश की मातृशक्ति उसका लोकतांत्रिक और सशक्त जवाब देना जानती है।
उन्होंने अंत में कहा कि महिलाओं के सम्मान, समान अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है। देश की नारी शक्ति आने वाले समय में और अधिक सशक्त होकर उभरेगी तथा ऐसे महिला विरोधी रवैये को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
