आत्मविश्वास एक दिन में नहीं बनता… तो क्या करें?
आज का युवा जानकारी के बोझ, पहचान के संकट, असफलता के भय और निरंतर तुलना की प्रवृत्ति के बीच जी रहा है. साधन बढ़े हैं, पर दिशा धुंधली हो गई है. मनोविज्ञान इसे जीवन के अर्थ के संकट के रूप में देखता है. ऐसे समय में छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन एक व्यावहारिक मार्ग दिखाता…
