श्री पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रन्यास के श्री द्वारकाधीश मंदिर कांकरोली में आज भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी वार शुक्रवार विक्रम संवत 2083 जन्माष्टमी व्रत, श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर परम पूज्य पीठाधीश्वर गोस्वामी 108 डॉ श्री वागीश कुमार जी महाराज श्री आज के दिन ही तृतीय पीठ गादी पर बिराजे (सं. 2080) दिनांक 07-09-2023 गादी पर बिराजे तीन वर्ष का समय हो गया है। चोथ वर्ष में प्रवेश किया है। इन तीन वर्षो में तृतीय पीठ के विकास में महाराज श्री ने बहुत काम किया है। जन्माष्टमी महोत्सव और नंद महोत्सव पर गोस्वामी श्री वागीश कुमार जी महाराज, तृतीय पीठ के युवराज गोस्वामी श्री वैदांतकुमारजी और तृतीय पीठ के युवराज गोस्वामी श्री सिद्धांत कुमार जी महोदय सभीप्रभु की सेवा में उपस्थित थे।

जन्माष्टमी पर मंगला के दर्शन प्रातः 5 बजे खुले। जो आधा घंटे तक दर्शन चलते रहे। इसके बाद लगभग 5:30 बजे पंचामृत के दर्शन बड़े अलोलिक दर्शन हुवे ।परम पूज्य पीठाधीश्वर गोस्वामी 108 डॉ श्री वागीश कुमार जी महाराज श्री और गोस्वामी श्री वैदांतकुमारजी महोदय ने प्रभु को स्नान करवाया साथ ही सालिगरामजी को दुध,दही, शक्कर,शहद,जल से पंचामृत किया। पंचामृत दर्शन के दौरान शंख,थाली-मादल, घंटियां बजाई गई। पंचामृत के दर्शन लगभग आधा घंटे तक दर्शन हुए। दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ी।हर व्यक्ति पंचामृत -स्नान के दर्शन का लाभ उठाया । दर्शनों के पश्चात प्राप्त करने वालों की होड़ लगी।
जन्माष्टमी पर श्रृंगार में प्रभु श्री मस्तक पे श्वेत बड़ी कुल्हे तापे तैरह चन्दिका का सादा जोड़, केसरी चाकदार वाघा, अतलस की लाल सूथन
हरे ठाडे वस्त्र रेशमी, हीरा पन्ना माणक के मिलमा आभरण, माला चरणारविन्द के श्रृंगार धारण कराये गए। श्रृंगार के दर्शन दोरान
प्रभु के तिलक के दर्शन हुए। महाराज श्री ने प्रभु को कंकु का तिलक लगाया। प्रभु के सन्नमुख मंदिर पंडित श्री बिन्दुलाल जी शर्मा और पंडित केशव जी सांचीहर ने कृष्ण जन्म
की पत्रिका पढ़ कर सुनाया। पंडित जी ने बताया कि “कृष्ण भगवान का 5252 वां जन्मदिन दिवस है” । इसके बाद में ग्वाल के दर्शन खुले। बाल लीला की परम्परा अनुसार प्रभु को खिलाया गया। राजभोग दर्शन में रामदेवरा यात्रियों भारी-भरकम भीड़ थी। दर्शनों के समय अष्ट छाप कवियों के अनेक पदों का गायन में “नन्द जू मेरे मन आनंद भयो है। “ब्रज में आज महा आनन्द “आज बधाई को दिन नीको ।”
जन्म के दर्शन रात्रि 12 बजे खुले। उसके पश्चात निश्चित समय जन्म होने पर घंटानाद हुआ और नगारखाना तथा कमल चौक में तेज
गति से नगारें बजने लग गये। मंदिर की छत्तों पर तैयार बैठे श्री द्वारकाधीश प्रभु के सिपाही
सर्तक सिपाही जैसे ही कृष्ण का जन्म हुआ और तुरंत प्रभु को 21 बंदुकों की गोलियां आकाश में छोड़ कर प्रभु को सलामी दी गई।उधर मंदिर में थाली-मादल, मृदंग,झांझ, नगाड़े, शंख आदि की तेज ध्वनि से मंदिर गुंजायमान हो उठा। उधर जन्म के साथ ही सालिगरामजी को पुनः पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके पश्चात उन्हें चंदन में स्नान करा कर श्री द्वारकाधीश जी की गोद में पधरा दिया जाता है फिर दोनों स्वरूपों के तिलक अक्षत चढ़ा कर माला धारण कराते और महाभोग आता है। भीतर ही छठी के कोठे में जाकर छठी का पूजन करते हैं।
“धन दिवस धन रात धन यह पहर घरी।
धन धन महरजू की कूंब व सुहाग भरी।
कल भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी शनिवार को नन्द महोत्सव बड़े हर्षोल्लास और और धुमधाम से मनाया जायेगा। प्रातः 10:40 ग्वाल दर्शन में प्रभु सोने के पलना में बिराजेगें।
श्री द्वारकाधीश मंदिर गोस्वामी परिवार से यशोदा मैया बनेगी और मंदिर मुखिया जी नंदबाबा श्री बनेंगे। कृष्ण जन्म के बाद दही दूध, हल्दी मिश्रित माखन , ठाकुर जी का प्रसाद लुटाया जायेगा।इस लीला का आंनद
की अनुभूति सभी जनों को प्राप्त होगी। जन्माष्टमी पर राजभोग, शयन की आरती महाराज श्री ने की।
