विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक और अग्रणी चांदी उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक ने पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने वर्ष 2020 से लेकर अब तक अपने विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में 8.55 लाख से अधिक पौधे लगाए हैं।
वैज्ञानिक वनीकरण, प्राकृतिक आवासों की बहाली और आधुनिक जैव विविधता प्रबंधन के जरिए हिंदुस्तान जिंक राजस्थान और उत्तराखंड में लगातार काम कर रही है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही कंपनी ने 1,13,500 से अधिक पौधे लगाए हैं। यह प्रयास वर्ष 2030 तक जैव विविधता हानि को पूरी तरह रोकने के कंपनी के दीर्घकालिक लक्ष्य का हिस्सा है।
पर्यावरण पुनर्स्थापन के लिए कंपनी अत्याधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों का उपयोग कर रही है:
चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर: माइकोराइजा तकनीक की मदद से 22.25 हेक्टेयर क्षेत्र का पुनर्स्थापन किया गया है।
राजपुरा दरीबा, चंदेरिया, देबारी और कायड़: मियावाकी तकनीक से सघन देशी वनों का विकास किया जा रहा है।
जावर माइंस: ‘ग्रीन जावर’ पहल के तहत रावा गांव में स्थानीय समुदाय के सहयोग से व्यापक पौधरोपण हुआ है।
रामपुरा आगुचा: देशी पौधों के संरक्षण और पौध तैयार करने के लिए विशेष नर्सरी विकसित की गई है।
कंपनी ने IUCN (International Union for Conservation of Nature) के सहयोग से अपना बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट प्लान अपडेट किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य विकास के साथ प्रकृति को बिना नुकसान पहुंचाए ‘नो नेट लॉस ऑफ बायोडायवर्सिटी’ हासिल करना है।
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा:
“जिम्मेदार खनन केवल बेहतर संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण तैयार करने से जुड़ा है। हमारा हर कदम औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
