अखिल भारत हिंदू क्रांति सेना, राजस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष, काली कल्याण शक्ति पीठ (सेक्टर-14) के गादीपति एवं विश्व महासेना के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. हेमंत जोशी का जन्मदिवस इस वर्ष पूर्णतः सेवा कार्यों को समर्पित रहा। इस शुभ अवसर पर अखिल भारत हिंदू क्रांति सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष योगेश पालीवाल, प्रदेश अध्यक्ष गणपत सिंह दुलावत, प्रदेश प्रभारी मनीष पालीवाल, उदयपुर संभाग प्रभारी नरेश कुमार भाट, उदयपुर जिला अध्यक्ष नाहर सिंह सुनील पालीवाल सहित संगठन के समस्त पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने डॉ. जोशी का मेवाड़ी पगड़ी और उपरणा ओढ़ाकर भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की मंगलकामना की।

‘जनसेवा ही ईश्वर सेवा’ के संकल्प के साथ शुरू हुआ दिन
डॉ. हेमंत जोशी ने अपने जन्मदिन को व्यक्तिगत उत्सव के बजाय समाज और राष्ट्र के प्रति दायित्व निभाने का जरिया बनाया। दिन की शुरुआत प्रातः काल उनके निवास स्थित गौशाला (परशुराम चौराहा) में गौ पूजन, गुड़, हरा चारा और लापसी खिलाकर की गई। इसके बाद महाकालेश्वर मंदिर (फतहसागर) में भगवान महाकाल का दुग्धाभिषेक कर विशेष पूजा-अर्चना की गई।
सेवा कार्यों की कड़ी में डॉ. जोशी मल्लातलाई स्थित दृष्टिबाधित विद्यालय पहुँचे, जहाँ उन्होंने बच्चों के साथ खेलकूद कर और प्रेमपूर्वक संवाद कर उनके लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की। इसके बाद युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने महाराणा भूपाल चिकित्सालय (एमबी हॉस्पिटल) के ब्लड बैंक में स्वैच्छिक रक्तदान किया। दोपहर में उदयपुर रेलवे स्टेशन, सुखाड़िया सर्किल एवं आसपास के क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों और बच्चों को जूते-चप्पल व मिठाइयों का वितरण किया गया।

धार्मिक अनुष्ठान और वृद्धाश्रम में बुजुर्गों का आशीर्वाद
दोपहर में सेक्टर-14 स्थित कल्लाजी मंदिर में विशेष महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में सनातन धर्म प्रेमियों और शुभचिंतकों ने हिस्सा लेकर डॉ. जोशी को बधाइयाँ दीं। शाम को तारा संस्थान (वृद्धाश्रम) में वरिष्ठजनों के साथ समय बिताकर उनके सम्मान में भोजन सेवा आयोजित की गई और बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया गया।
अनाथ बच्चों के साथ बोटिंग कर चेहरे पर लाई मुस्कान
इस पूरे सेवा अभियान का समापन सुखाड़िया सर्किल क्षेत्र में अनाथ बच्चों के साथ बोटिंग करने और उन्हें भोजन कराने के साथ हुआ। डॉ. हेमंत जोशी ने इस अवसर पर कहा कि, “सच्चा जन्मदिवस वही है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाए। जनसेवा ही ईश्वर सेवा है और हमारी सनातन संस्कृति का यही मूल संदेश है।” पूरे दिन चले इन सेवा प्रकल्पों की शहरभर में सराहना हो रही है।
