जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा के नेतृत्व में जिला प्रशासन राजसमंद द्वारा किसानों के कल्याण से जुड़ी भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना एग्रिस्टैक (फार्मर रजिस्ट्री) में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए जिले ने शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ ही जिले के सभी पात्र किसानों को योजना से जोड़ते हुए उन्हें लाभान्वित करने का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया है। यह उपलब्धि जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा के कुशल नेतृत्व, मार्गदर्शन एवं निरंतर मॉनिटरिंग का परिणाम है।
पूर्व में, जनवरी 2026 तक जिले में कुल पंजीकरण प्रगति 83.96 प्रतिशत ही हो पाई थी, जिसका प्रमुख कारण फील्ड स्तर के कार्मिकों पर कार्यभार अधिक होना तथा किसान समुदाय का दिन में कृषि कार्यों में व्यस्त रहना था। इन चुनौतियों के बावजूद जिला प्रशासन ने रणनीतिक रूप से विशेष अभियान चलाते हुए इस लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया।
विशेष अभियान, रात्रि शिविर और डोर-टू-डोर संपर्क बने सफलता की कुंजी:
जिला प्रशासन द्वारा नवाचार करते हुए “कृषक अधिकार पंजीयन पखवाड़ा” के अंतर्गत गाँव-गाँव और मजरे-मजरे में शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से उन किसानों तक पहुंच बनाई गई जो दिन में उपलब्ध नहीं हो पाते थे। साथ ही, पटवारी, भू-अभिलेख निरीक्षक, नायब तहसीलदार एवं अन्य राजस्व कार्मिकों ने डोर-टू-डोर संपर्क कर पंजीकरण सुनिश्चित किया। पहली बार राजस्व अधिकारी ख़ुद किसानों तक पहुंचे।

इस सामूहिक प्रयास का परिणाम यह रहा कि 29 दिसंबर 2025 तक जहां कुल 1,70,148 पंजीकरण (83.96%) थे, वहीं 01 अप्रैल 2026 तक यह संख्या बढ़कर 2,02,782 हो गई, जो कुल लक्ष्य 2,02,658 के मुकाबले 100.06 प्रतिशत है।
तहसीलवार प्रगति में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। राजसमंद (108.91%), कुंभलगढ़ (105.14%), आमेट (104.82%), कुवारिया (101.13%) सहित अधिकांश उपखंडों ने 100 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि दर्ज की। देलवाड़ा, देवगढ़, रेलमगरा, खमनोर और नाथद्वारा जैसे क्षेत्रों ने भी लक्ष्य को पूर्ण करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
टीम भावना और समर्पण से मिली सफलता: कलेक्टर ने दी बधाई:
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर जिला कलेक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा ने समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि “फार्मर रजिस्ट्री के कार्य को वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक शत-प्रतिशत पूर्ण करना पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर, सभी उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, भू-अभिलेख निरीक्षक एवं पटवारियों ने जिस प्रकार दिन-रात एक कर इस कार्य को पूर्ण किया है, वह प्रशंसनीय है।”

कलेक्टर ने कहा कि “कार्मिकों ने गाँव-गाँव और घर-घर जाकर इस मिशन को सफल बनाया है, जो कर्तव्यपरायणता और जनसेवा के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। कार्मिकों की इस ऊर्जा और प्रतिबद्धता ने जिले को गौरवान्वित किया है। उन्हें विश्वास है कि भविष्य में भी हम इसी टीम भावना के साथ जनहित के कार्यों में नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे।”
उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को “शाबाश” कहते हुए इस उपलब्धि को जिले के लिए प्रेरणादायक बताया।
यह सफलता न केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है, बल्कि यह दर्शाती है कि मजबूत नेतृत्व, सुनियोजित रणनीति और टीमवर्क के माध्यम से किसी भी चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
जानिए, यह है फार्मर रजिस्ट्री:
फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों को 11 अंकों की एक यूनिक डिजिटल पहचान उपलब्ध कराई जाती है, जिसे किसान आईडी कहा जाता है। इस डिजिटल पहचान में किसान के जनसांख्यिकीय विवरण, स्वामित्व वाली भूमि तथा बोई गई फसलों से संबंधित समग्र एवं उपयोगी जानकारी दर्ज रहती है, जिससे किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा और पारदर्शी लाभ सुनिश्चित किया जा सके।
फार्मर रजिस्ट्री का उद्देश्य केंद्र एवं राज्य सरकार की कृषक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बिचौलिये के किसानों तक पहुंचाना है। इसके माध्यम से पीएम किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल ऋण, फसल बीमा, एमएसपी आधारित खरीद, कृषि अनुदान योजनाएं तथा आपदा मुआवजा जैसी योजनाओं का लाभ प्राप्त करना आसान होगा। एग्रीस्टैक योजना के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में फार्मर रजिस्ट्री तैयार की जा रही है और राजस्थान में यह किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।
खास बात यह कि हर किसान है पात्र:
सभी प्रकार के किसान—सीमांत, लघु एवं बड़े किसान—इस योजना के अंतर्गत पात्र हैं। महिला भूमिधारकों का भी फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण किया जा रहा है। प्रत्येक भूमि स्वामी किसान की फार्मर आईडी बनाई जाती है। भूमि स्वामित्व के आधार पर पंजीकरण किया जाता है, हालांकि किराए पर खेती करने वाले किसानों के लिए कुछ विशेष परिस्थितियों में अपवाद संभव हैं।
फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, नवीनतम खसरा या जमाबंदी की प्रति तथा आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर आवश्यक है। पैन कार्ड की आवश्यकता नहीं है। आधार और जमाबंदी में नाम मिलान नहीं होने की स्थिति में भी पंजीकरण संभव है, जिसे गिरदावर एवं तहसीलदार के माध्यम से सत्यापित किया जाता है। भविष्य में योजनाओं के निर्बाध लाभ के लिए आधार कार्ड में नाम की शुद्धता आवश्यक होगी।
एक मोबाइल नंबर पर दो किसान हो सकते हैं पंजीकृत:
भारत सरकार के निर्देशानुसार एक मोबाइल नंबर से दो किसानों का पंजीकरण किया जा सकता है। राज्य में ग्राम पंचायत स्तर पर शिविरों के माध्यम से फार्मर रजिस्ट्री का पंजीकरण किया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूर्णतया ऑनलाइन है, निःशुल्क है और औसतन 10 से 15 मिनट में पूर्ण हो जाती है। विवाहित महिलाएं या अन्य स्थानों पर निवास करने वाले किसान अपने परिजनों के माध्यम से ओटीपी साझा कर पंजीकरण करवा सकते हैं।
फार्मर रजिस्ट्री एक बार बनवानी होती है, इसके बाद उत्तराधिकार या भूमि क्रय-विक्रय की स्थिति में विवरण स्वतः अद्यतन हो जाता है। प्रत्येक किसान का अलग-अलग पंजीकरण आवश्यक है। अन्य राज्यों के निवासी भी यदि उनकी भूमि राजस्थान में है तो आधार के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं। फार्मर आईडी बनने के बाद यूएफआर सुविधा के माध्यम से नए खसरे जोड़े जा सकते हैं तथा डी-लिंक सुविधा से गलत जुड़े खसरे हटाए जा सकते हैं।
बेहद आसान है फार्मर आईडी बनवाना:
फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण ई-मित्र, सीएससी केंद्र, ग्राम पंचायत अथवा तहसील कार्यालय के माध्यम से कराया जा सकता है। पीएम किसान योजना में नए पंजीकरण एवं पीएम फसल बीमा योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य है। निकट भविष्य में कृषि एवं सहकारिता विभाग की सभी किसान केंद्रित योजनाओं में लाभ प्राप्त करने के लिए फार्मर आईडी आवश्यक होगी।
