राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और लोक पर्वों की झलक राजसमंद में देखते ही बनी। राजसमन्द नगर परिषद की ओर से आयोजित पांच दिवसीय गणगौर महोत्सव के चौथे दिन रविवार को ‘हरि गणगौर’ की भव्य सवारी निकाली गई। यह सवारी अपने आप में इतनी खास है कि इसे जयपुर के बाद राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी गणगौर सवारी माना जाता है।
शाही ठाठ-बाट और परंपराओं के अनूठे संगम के साथ यह शोभायात्रा प्रभु द्वारिकाधीश मंदिर से शुरू हुई। सवारी में ईसर और गणगौर की आकर्षक प्रतिमाएं सभी के आकर्षण का केंद्र रहीं। शोभायात्रा का दृश्य बेहद मनमोहक था—सजे-धजे ऊंट, दौड़ते घोड़े, मंदिर के बैंड की मधुर धुन और सिर पर कलश लिए चलती नन्ही बालिकाएं राजस्थान की समृद्ध संस्कृति को जीवंत कर रही थीं

प्रशासन और नगर परिषद द्वारा पूरे मार्ग को विशेष रूप से सजाया गया था। जैसे ही सवारी मुख्य मार्गों से गुजरी, हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे और उत्सव का माहौल ऐसा था मानो पूरी नगरी गणगौर के रंग में रंग गई हो।
राजसमंद की यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह यहां के गौरवशाली इतिहास को भी दर्शाती है।
