राजसमंद के प्रसिद्ध पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रभु द्वारिकाधीश मंदिर में आज आस्था और आध्यात्म का संगम देखने को मिला। चैत्र कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी के पावन अवसर पर प्रख्यात गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज श्री ने प्रभु के दरबार में हाजिरी लगाई। स्वामी जी ने यहाँ प्रभु के नयनाभिराम स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज आज मंदिर परिसर पहुँचे, जहाँ उन्होंने उत्थापन दर्शन की झांकी के दर्शन किए। प्रभु के दर्शन पाकर महाराज श्री भावुक और आनंदित नजर आए। दर्शन के पश्चात उन्हें मंदिर के स्वागत कक्ष ले जाया गया, जहाँ मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया गया।
मंदिर प्रशासन की ओर से महाराज श्री को:
सम्मान स्वरूप उपरना ओढ़ाया गया।
परंपरागत पान बीड़ा और प्रसाद की टोकरी भेंट की गई।
ज्ञानवर्धन हेतु ‘श्री द्वारकाधीश प्राकट्य वार्ता’ और ‘कांकरोली का इतिहास’ पुस्तकें भेंट की गईं।
(महाराज श्री का संदेश):
इस दिव्य यात्रा की स्मृतियों को संजोते हुए स्वामी ज्ञानानंद जी ने मंदिर की विजिटिंग बुक में अपने उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने लिखा:
“भगवान का श्री द्वारकाधीश स्वरूप में पुनः एक बार दर्शन सौभाग्य पाकर तन और मन आल्हादित व रोमांचित है। निस्संदेह यहाँ का भाव सदैव स्मरणीय है। द्वारकाधीश भगवान की कृपा सदैव सब पर बनी रहे।”
स्वामी जी के आगमन से मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं में भी भारी उत्साह देखा गया। दर्शन के दौरान मंदिर के सेवादारों और अधिकारियों ने उनकी अगवानी की और उन्हें मंदिर की गौरवशाली व्यवस्थाओं से अवगत कराया।
