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राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी गणगौर सवारी: राजसमंद में पांच दिवसीय महोत्सव शुरू, ईसर-गणगौर की मनमोहक झांकियों ने मोहा मन।

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राजस्थान अपनी संस्कृति और त्योहारों के लिए दुनिया भर में मशहूर है, और इन दिनों राजसमंद शहर पूरी तरह से गणगौर के उत्सव के रंग में रंगा नजर आ रहा है। नगर परिषद की ओर से आयोजित पांच दिवसीय गणगौर महोत्सव के तीसरे दिन शनिवार को शहर में श्रद्धा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला।

राजसमंद की गलियों में जब ईसर-गणगौर की प्रतिमाएं निकलीं, तो हर कोई ठिठक कर देखता रह गया। शनिवार को प्रभु द्वारिकाधीश के मंदिर से ‘चूंदड़ी गणगौर’ की भव्य सवारी निकाली गई। इस शोभायात्रा में पारंपरिक लवाजमा, मंदिर का बैंड, सजे-धजे ऊंट-घोड़े और आकर्षक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।

विशेष रूप से पारंपरिक वेशभूषा में सजी नन्ही बालिकाएं, जो सिर पर मंगल कलश लेकर चल रही थीं, ने इस शोभायात्रा की शोभा और बढ़ा दी। मंदिर परिसर से लेकर पूरे सवारी मार्ग को दुल्हन की तरह सजाया गया था।

आपको बता दें कि राजसमंद की गणगौर की सवारी को राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी सवारी माना जाता है। यही कारण है कि इसे देखने के लिए न केवल शहर, बल्कि आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हैं।

महोत्सव का यह सिलसिला अभी थमा नहीं है। आगामी कार्यक्रमों के अनुसार:

22 मार्च: हरी गणगौर की भव्य सवारी निकाली जाएगी।

23 मार्च: गुलाबी गणगौर की सवारी के साथ उत्सव का आनंद दोगुना होगा।

इन सभी सवारियों का समापन शहर के बालकृष्ण स्टेडियम में हुआ, जहां देर रात तक भजन संध्या का आयोजन हुआ। राजसमंद का यह महोत्सव न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध विरासत की झलक भी है।

 

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