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कृष्णा जांच लैब विवाद ने पकड़ा तूल: कांग्रेस का जिला अस्पताल पर प्रदर्शन, फर्जी रिपोर्टों का आरोप, कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

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नाथद्वारा जिला अस्पताल में मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना के तहत संचालित कृष्णा जांच लैब को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। जांच रिपोर्टों में कथित गड़बड़ियों और सामने आए दस्तावेजों के बाद मंगलवार को नाथद्वारा कांग्रेस कमेटी ने जिला अस्पताल के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर नारेबाजी की तथा पीएमओ डॉ. अनिल शाह को ज्ञापन सौंपकर मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में संचालित जांच लैब की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है तथा आमजन को मिलने वाली जांच रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ज्ञापन में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अस्पताल की लैब व्यवस्था “राम भरोसे” संचालित हो रही है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने उस मरीज आयुष की जांच रिपोर्टों का भी उल्लेख किया, जिनमें कथित रूप से बड़ा अंतर सामने आया था। कांग्रेस ने दावा किया कि जिन सवालों को लेकर पिछले दिनों मामला उठा था, अब वही बातें दस्तावेजों के साथ सामने आ रही हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

एक बच्चे के प्लेटलेट्स, दूसरे के ब्लड ग्रुप पर उठे सवाल

गौरतलब है कि हाल ही में सामने आए दस्तावेजों में एक वर्षीय बालक की रिपोर्ट में प्लेटलेट्स को लेकर बड़ा अंतर दिखाई देने का दावा किया गया था। वहीं सात वर्षीय बालक की दो रिपोर्टों में अलग-अलग ब्लड ग्रुप दर्ज होने का मामला भी चर्चा में है। इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद जांच प्रक्रिया और रिपोर्टों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

हालांकि इन मामलों की वास्तविकता और रिपोर्टों की सच्चाई का अंतिम निष्कर्ष आज होने वाली जांच कमेटी की जांच के बाद ही सामने आएगा।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि आमजन के स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में शीघ्र एवं निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को जिला स्तर से प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अब पूरे मामले में मरीजों, जनप्रतिनिधियों और आमजन की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्योंकि यह विवाद अब केवल एक लैब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता के भरोसे और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कमेटी के छोटे बड़े पदाधिकारी, एवं कार्यकर्ता गण मौजूद थे।

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