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गढ़बोर में भक्ति का गुलाल: सोने के झूले में विराजे चारभुजा नाथ, मेवाड़ी गेर और हरजस गान से महका फागोत्सव।

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मेवाड़ की पावन धरा पर जहां भक्ति और शक्ति का संगम होता है, वहां इन दिनों आस्था के अनूठे रंग देखने को मिल रहे हैं। सुप्रसिद्ध कृष्ण धाम गढ़बोर चारभुजा नाथ मंदिर में फागोत्सव की धूम मची है। दिलचस्प बात यह है कि जहां अधिकांश जगहों पर होली का समापन हो चुका है, वहीं यहाँ से उत्सव की असली शुरुआत हुई है।”

राजसमंद जिले के गढ़बोर स्थित चारभुजा नाथ मंदिर में फागुन का खुमार सिर चढ़कर बोल रहा है।  यहाँ होली के बाद फागोत्सव का विशेष आयोजन किया जाता है। प्रतिदिन दोपहर बाद भगवान चारभुजा नाथ को मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाकर भव्य ‘सोने के झूले’ में विराजित किया जाता है।

ठाकुरजी का विशेष श्रृंगार मन मोह लेने वाला होता है। पुजारी परिवार द्वारा जब पारंपरिक ‘हरजस गान’ शुरू किया जाता है, तो पूरा परिसर भक्तिमय हो उठता है। राजस्थान ही नहीं, बल्कि गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से आए हजारों श्रद्धालु अपने आराध्य पर अबीर-गुलाल उड़ाकर उनके साथ होली खेलने का आनंद ले रहे हैं।

दिन में जहां भजनों की गूंज होती है, वहीं रात का नजारा और भी अद्भुत होता है। मंदिर चौक में मेवाड़ी वेशभूषा पहने युवा, बुजुर्ग और बच्चे पारंपरिक ‘गेर नृत्य’ करते हैं। ढोल की थाप पर थिरकते कदम और हाथों में टकराती लाठियां मेवाड़ की संस्कृति को जीवंत कर देती हैं।

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