राजसमंद जिले के नाथद्वारा स्थित पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी मंदिर में खग्रास चंद्रग्रहण के अवसर पर विशेष दर्शन आयोजित किए गए। ग्रहण काल के दौरान मंदिर के कपाट खुले रहे, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर भजन-कीर्तन, परिक्रमा और दान-पुण्य किया।
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार को चंद्रग्रहण के कारण डोलोत्सव के सेवा क्रम में आंशिक परिवर्तन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए केवल एक दर्शन खोले गए। सुबह 9:15 बजे डोलोत्सव के राजभोग दर्शन प्रारंभ हुए, जो लगभग सवा तीन घंटे तक जारी रहे।
इसके बाद ग्रहण काल के विशेष दर्शन दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक खुले रहे और श्रद्धालुओं ने पूरे ग्रहण काल में ठाकुरजी के दर्शन किए।

इस दौरान युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा द्वारा शाम 5 बजकर 4 मिनट पर डोल तिबारी में श्रीनाथजी के सन्मुख गौदान किया गया। वहीं श्री नवनीत प्रियाजी मंदिर में भी गोस्वामी विशाल बावा ने गौदान की परंपरा का निर्वहन किया। इसके बाद बैठकजी में वल्लभकुल परिवार की ओर से तिलपात्र, घृतकुंभ, गौदान और छाया दान किया गया। मंदिर के पंड्याजी डॉ. परेश नागर द्वारा पूर्ण विधि-विधान से दान-पुण्य करवाया गया।

ग्रहण दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने दर्शन के साथ भजन-कीर्तन, परिक्रमा और दान-पुण्य किया। मंदिर मंडल की ओर से दंडवत (लेटकर) परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष मैटिंग की व्यवस्था की गई। वहीं पूज्यपाद तिलकायत इंद्रदमन महाराज की आज्ञा और युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा की प्रेरणा से दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर द्वारा दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई।
चंद्रग्रहण का पर्वकाल 3 घंटे 27 मिनट का रहा। ग्रहण के मोक्षकाल शाम 6:47 बजे दर्शन बंद किए गए, जिसके बाद मंदिर परिसर को धोकर शुद्धिकरण किया गया। ग्रहण के सूतक के कारण राजभोग में बने सभी सखड़ी प्रसाद को गौशाला में गायों के लिए भेज दिया गया।

उल्लेखनीय है कि खग्रास चंद्रग्रहण के दौरान जहां देश के अधिकांश मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं, वहीं नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में पुष्टिमार्ग की परंपरा के अनुसार ग्रहण काल में भी दर्शन खुले रहते हैं, जिससे श्रद्धालुओं को विशेष अवसर पर दर्शन का लाभ मिलता है।
