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सेवा मंदिर एवं जिला परिषद के मध्य एमओयू, 13 ग्राम पंचायतों में होगा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना का क्रियान्वयन

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जिले में स्वच्छ एवं टिकाऊ ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने की दिशा में शुक्रवार को जिला कलक्टर कार्यालय में जिला परिषद राजसमंद एवं सेवा मंदिर उदयपुर के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर जिला कलक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री बृजमोहन बैरवा, सेवा मंदिर मुख्य संचालक रौनक शाह, कार्यक्रम समन्वयक रिमझिम पांडे, जिला स्वच्छता समन्वयक नानालाल साल्वी पदाधिकारी उपस्थित रहे।

एमओयू के तहत राजसमंद जिले की 13 चयनित ग्राम पंचायतों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) परियोजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-2 के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर विकेन्द्रीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ करना, कचरे के पृथक्करण, सुरक्षित निस्तारण एवं पुनर्चक्रण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा स्थानीय स्तर पर प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आवश्यक संस्थागत एवं आधारभूत संरचना को मजबूत करना है।

परियोजना के अंतर्गत खमनोर पंचायत समिति की सलोदा, टाटोल, उनवास एवं खमनोर ग्राम पंचायतों, देलवाड़ा पंचायत समिति की कालीबास, नेगड़िया, बिलोता, नेड़च, घोडच, सेमल एवं देलवाड़ा ग्राम पंचायतों तथा केलवाड़ा एवं गढ़बोर ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। इन ग्राम पंचायतों में समुदाय आधारित अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

एमओयू के अनुसार जिला परिषद राजसमंद परियोजना के सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक प्रशासनिक एवं विभागीय समन्वय उपलब्ध कराएगी। साथ ही ग्राम पंचायतों एवं उनके कार्मिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने, रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने, आवश्यक विद्युत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा एवं ग्राम पंचायत विकास योजना जैसी विभिन्न योजनाओं के अभिसरण में सहयोग प्रदान करेगी।

वहीं सेवा मंदिर उदयपुर चयनित ग्राम पंचायतों में जनजागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करेगा। संस्था ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, स्वच्छता कर्मियों, स्वयं सहायता समूहों, सामुदायिक संगठनों एवं ग्रामीणों को परियोजना से जोड़ते हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति व्यवहार परिवर्तन की दिशा में कार्य करेगी। इसके अतिरिक्त विद्यालयी विद्यार्थियों एवं युवाओं को भी जागरूकता गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। आवश्यकता अनुसार कचरा संग्रहण वाहनों की उपलब्धता, रिसोर्स रिकवरी सेंटरों में मशीनों की स्थापना की संभावनाओं का परीक्षण तथा स्वच्छता कर्मियों को दस्ताने, मास्क, जूते एवं वर्दी जैसे सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

यह समझौता ज्ञापन 30 सितंबर 2027 तक प्रभावी रहेगा। परियोजना की नियमित समीक्षा एवं प्रगति मूल्यांकन के लिए जिला परिषद, सेवा मंदिर एवं संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति प्रत्येक तिमाही बैठक आयोजित करेगी। सेवा मंदिर द्वारा परियोजना की त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी तथा पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए परियोजना संबंधी आंकड़ों का नियमित संधारण किया जाएगा।

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