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मोही में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिवस संतों के सान्निध्य में उमड़ा आस्था का सागर, श्रद्धालु हुए भावविभोर

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ठिकाना परिवार मोही द्वारा राजपूत सामुदायिक भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठे दिवस भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर दोपहर 2 बजे से ही श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया और देखते ही देखते पूरा पांडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया।

भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। छठे दिवस के अवसर पर कथा महोत्सव में राष्ट्रीय महाकाल सेना के संस्थापक श्री श्री 1008 दिगम्बर खुशाल भारती जी महाराज एवं तकड़ियो का गुड़ा आश्रम के पूज्य हरिशरण महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।संत-महात्माओं के आगमन पर आयोजन समिति एवं ठिकाना परिवार द्वारा पुष्पमालाओं, शॉल एवं सम्मान स्वरूप उनका अभिनंदन किया गया।

कथा वाचक पंडित विष्णुकांत शास्त्री ने श्रीमद्भागवत के दिव्य प्रसंगों का वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की लोककल्याणकारी लीलाओं, भक्तवत्सल स्वरूप एवं धर्म स्थापना के संदेश को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मनुष्य को ईश्वर से जोड़ने के साथ-साथ जीवन में नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों को स्थापित करने का कार्य करती है। कथा का श्रवण करने से मन की अशांति दूर होती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस अवसर पर श्री श्री 1008 दिगम्बर खुशाल भारती जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सनातन संस्कृति की जड़ें कथा, सत्संग एवं संतों के सान्निध्य से मजबूत होती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को धर्म, राष्ट्र एवं संस्कृति के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है। भागवत कथा जैसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने के साथ-साथ सामाजिक समरसता को भी सुदृढ़ बनाते हैं। पूज्य हरिशरण महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में धर्म, सेवा और सदाचार को अपनाना चाहिए। भगवान की कथा और संतों का सान्निध्य जीवन को सही दिशा प्रदान करता है तथा आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान की लीलाओं का श्रवण कर भावविभोर हो उठे ।भजन-कीर्तन और जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने संत-महात्माओं के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और स्वयं को सौभाग्यशाली माना। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, धर्मप्रेमी जनों, महिलाओं, युवाओं एवं बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। आयोजन समिति द्वारा सभी संत-महात्माओं का सम्मान किया गया। कथा के समापन पर भगवान की महाआरती संपन्न हुई तथा विश्व शांति, राष्ट्र की उन्नति एवं समाज के कल्याण की मंगलकामना की गई। छठे दिवस का आयोजन संतों के दिव्य सान्निध्य, आध्यात्मिक संदेशों एवं श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कथा महोत्सव की पूर्णाहुति एवं समापन समारोह 12 जून को आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

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