पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी की हवेली में आगामी 13 जून को एक बेहद खास और दिव्य उत्सव का आयोजन होने जा रहा है। पीठाधीश्वर गोस्वामी तिलकायत श्री 108 श्री इन्द्रदमन जी महाराज श्री के मनोरथ स्वरूप, अधिक ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी (शनिवार, 13 जून 2026) को लाड़लेलाल नन्दनन्दन श्री नवनीतप्रिय जी प्रभु लालबाग पधारेंगे।
श्री आचार्यचरण श्रीमहाप्रभुजी एवं श्रीगुसाईंजी परमदयाल की कानि से प्रभु लालबाग स्थित श्री यमुना पुलिन पर हिंडोरा झूलेंगे और आग्रही जीवों पर अपनी असीम कृपा-वृष्टि करेंगे।

यह अलौकिक आयोजन गोस्वामी तिलकायत श्री १०८ श्री इन्द्रदमन जी महाराज श्री की आज्ञा से आयोजित किया जा रहा है। उत्सव को भव्य रूप देने के लिए गोस्वामी चिरंजीव श्री १०५ श्री विशाल बावा साहब एवं श्री १०५ श्री लाल बावा साहब सहित पूरे तिलकायत परिवार का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा। श्री आचार्यचरण और श्री गुसाईजी की असीम कृपा से इस “यमुना पुलिन हिंडोलना” सुंदर मनोरथ की तैयारियां जोरों पर हैं।

भव्य शोभायात्रा: उत्सव की शुरुआत उत्थापन दर्शन के उपरांत शाम 05:00 बजे होगी। श्रीनाथजी की हवेली से भव्य शोभायात्रा रवाना होकर चौपाटी, गोविंद चौक और 120 फीट रोड होते हुए लालबाग पहुंचेगी।
मनोरथ दर्शन का समय: श्रद्धालु और पुष्टि सृष्टि सायं 07:00 बजे से प्रभु के इस अद्भुत और अलौकिक रूप के दर्शन कर सकेंगे।
श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए मंदिर मंडल और प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं:
प्रवेश: दर्शनार्थियों के लिए प्रवेश मार्ग दामोदरलाल महाराज स्टेडियम से रखा गया है।
निकासी: दर्शन करने के बाद श्रद्धालुओं की निकासी ग्रामीण हाट बाजार की तरफ से होगी।
श्री विशाल बावा साहब के निर्देशानुसार निशक्तजनों, वृद्धजनों व दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से वीलचेयर कॉरिडोर की व्यवस्था की जा रही है।
पार्किंग व्यवस्था: वाहनों के लिए पार्किंग की माकूल व्यवस्था दामोदरलाल महाराज स्टेडियम में ही की गई है ताकि यातायात सुचारू बना रहे।
विशेष निवेदन: “गुलाबी रंग” में रंगेगी पुष्टि सृष्टि ।
मंदिर मंडल और गोस्वामी परिवार की ओर से समस्त पुष्टि सृष्टि और वैष्णवजनों से विशेष अनुरोध किया गया है कि वे इस दिव्य मनोरथ के अवसर पर गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कर पधारें। गुलाबी रंग के परिधानों में सजकर सभी श्रद्धालु लाड़लेलाल के इस अलौकिक उत्सव के रंग में रंग जाएँ और प्रभु की कृपा, माधुर्य एवं अनुग्रह का आनंद प्राप्त कर स्वयं को धन्य करें।
