राजसमंद विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने 25 जून 1975 को देश पर थोपा गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि यह संविधान की मूल भावना, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों पर सीधा प्रहार था। उन्होंने कहा कि सत्ता सुख के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने संविधान की मर्यादाओं को रौंदते हुए पूरे देश को भय और दमन के वातावरण में धकेल दिया।

विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने कहा कि आपातकाल के दौरान असहमति को अपराध बना दिया गया था। हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और लोकतंत्र समर्थकों को बिना न्यायिक प्रक्रिया के गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया तथा समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लगाकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटा गया। लोकतंत्र पर पहरा बैठा दिया गया और जनता के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन किया गया।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार ने कभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं में विश्वास नहीं किया — तब भी नहीं और आज भी नहीं। सत्ता को अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझने की इस मानसिकता ने देश को अपूरणीय क्षति पहुँचाई।
विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आज का भारत लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने, सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि 25 जून को ‘संविधान रक्षा दिवस’ के रूप में स्मरण करें और लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सदैव जागरूक एवं प्रतिबद्ध रहें।
