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चूल्हे-चौके से डिजिटल मार्केट तक: कॉर्पोरेट तड़के के साथ अब देश चखेगा ग्रामीण सखियों के हाथ का ‘मिलेट स्वाद’!”

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ग्रामीण राजस्थान की महिलाओं के हुनर को अब डिजिटल बाज़ार के पंख लग गए हैं। राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स के आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए हिंदुस्तान जिंक ने अपने सीएसआर (CSR) कार्यक्रम के तहत राजपुरा दरीबा क्षेत्र में एक नई ‘मिलेट यूनिट’ की शुरुआत की है।

हिंदुस्तान जिंक के स्वतंत्र निदेशकों द्वारा शुरू की गई इस यूनिट में हर महीने 1250 किलो पौष्टिक मिलेट कुकीज़ बनाई जाएंगी। इससे स्थानीय महिलाओं को सीधा रोज़गार तो मिलेगा ही, साथ ही पोषण से भरपूर उत्पाद बाज़ार में पहुंचेंगे।

आपको बता दें कि जिंक की ‘सखी पहल’ से जुड़ी ‘सखी उत्पादन समिति’ आज 25 हजार से अधिक महिलाओं को सशक्त बना रही है। इनके दो प्रमुख ब्रांड्स हैं—शुद्ध खाद्य पदार्थों के लिए ‘दायची’ और राजस्थानी ब्लॉक प्रिंट कपड़ों के लिए ‘उपाया’।

कमाल की बात यह है कि ये उत्पाद अब अमेज़न, फ्लिपकार्ट और ओएनडीसी पर धूम मचा रहे हैं। ‘गौयम गाय के घी’ को जहाँ अमेजन्स चॉइस मिला है, वहीं आम का अचार बेस्टसेलर बन चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस समिति ने 2.57 करोड़ का शानदार बिजनेस किया है।

साफ़ है कि सामाजिक बाधाओं को तोड़कर ये ग्रामीण महिलाएं अब देश के लिए एक नई मिसाल बन चुकी हैं।

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