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मोही में श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस संत महापुरुषों के सान्निध्य में भक्ति का उमड़ा सागर, श्रद्धालुओं ने किया धर्म लाभ

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ठिकाना परिवार मोही द्वारा राजपूत सामुदायिक भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के पंचम दिवस भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के पांचवें दिन क्षेत्र सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। कथा स्थल पर पूरे समय भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष, भजन-कीर्तन एवं धर्ममय वातावरण बना रहा।

पंचम दिवस पर कथा महोत्सव में डॉ. वागीश कुमार, अनुज दास जी महाराज तथा कंकु मैय्या जी का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। संत-महात्माओं के आगमन पर आयोजन समिति एवं श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पमालाओं एवं सम्मान के साथ उनका अभिनंदन किया गया।

कथा वाचक पंडित विष्णुकांत शास्त्री ने श्रीमद्भागवत के दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्तों के प्रति उनकी करुणा तथा धर्म की स्थापना के संदेश को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक जागृति का माध्यम है, जो व्यक्ति को सदाचार, सेवा और प्रभु भक्ति की ओर अग्रसर करती है। इस अवसर पर तृतीय पीठाधीश्वर महाराज डॉ. वागीश कुमार जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की अमूल्य धरोहर है। कथा श्रवण से मनुष्य के अंत:करण की शुद्धि होती है तथा जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को धर्म, संस्कार और संस्कृति से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है और ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं। मेवाड़ महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 अनुज दास जी महाराज ने कहा कि भगवान का नाम और कथा ही कलियुग में मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में सेवा, परोपकार और धर्म के मार्ग को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जहां संतों का सान्निध्य और भगवान की कथा होती है, वहां स्वयं ईश्वर की कृपा बरसती है। गढ़वाड़ा आश्रम की पूज्य कंकु मैय्या जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सदैव सत्य, प्रेम और भक्ति को स्थान देना चाहिए। उन्होंने महिलाओं एवं युवाओं से परिवार और समाज में संस्कारों की परंपरा को मजबूत बनाने का संदेश दिया। संत महापुरुषों के उद्बोधनों से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा स्थल पर उपस्थित भक्तों ने संतों के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य महसूस किया। पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु भजन-कीर्तन में लीन रहे। कथा महोत्सव में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, धर्मप्रेमी जनों, महिलाओं, युवाओं एवं बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।आयोजन समिति द्वारा संत-महात्माओं का सम्मान किया गया तथा सभी अतिथियों का स्वागत-अभिनंदन किया गया। कथा के अंत में भगवान की महाआरती संपन्न हुई और उपस्थित श्रद्धालुओं ने विश्व कल्याण, क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं समाज में सद्भावना की कामना की। पंचम दिवस का आयोजन संतों के सान्निध्य और दिव्य आध्यात्मिक वातावरण के कारण श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया। 12 जून तक चलने वाले इस कथा महोत्सव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

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