राजसमन्द जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में मैराथन जिला स्तरीय समीक्षा बैठकें आयोजित हुई। बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर नरेश बुनकर, जिला परिषद सीईओ बृजमोहन बैरवा, जिले के समस्त जिला स्तरीय अधिकारी, सभी उपखंड अधिकारी- बृजेश गुप्ता (राजसमंद), साक्षी पूरी (कुंभलगढ़), विकास शर्मा (भीम), गोविंद सिंह (आमेट), बिन्दु बाला राजावत (रेलमगरा), मोहकम सिंह (देवगढ़) एवं सभी पंचायत समितियों के विकास अधिकारी आदि उपस्थित रहे। बैठक में प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ जनकल्याणकारी अभियानों, जवाबदेही व्यवस्था तथा जनसमस्याओं के त्वरित समाधान पर गहन चर्चा की गई।

बैठक के दौरान जिला कलक्टर ने अधिकारियों को अत्यंत संवेदनशील और प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल नियमों और विभागीय सीमाओं का ज्ञान देना नहीं, बल्कि आमजन की समस्या का समाधान करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार आमजन परेशान होकर कार्यालयों में आता है और उसे यह कहकर लौटा दिया जाता है कि मामला किसी अन्य विभाग का है, जबकि जनता को विभागों की नहीं बल्कि अपनी समस्या के समाधान की आवश्यकता होती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अधिकारी “ज्ञान नहीं, समाधान” की कार्यशैली अपनाएं तथा हर स्थिति में राहत, संवेदनशीलता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। जिला कलक्टर के इस संदेश ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को जनसेवा के मूल उद्देश्य की याद दिलाई।
समाचारों पर त्वरित कार्रवाई के लिए आरएनएमएस पोर्टल शुरू:
बैठक में कलक्टर हसीजा के नेतृत्व में जिला प्रशासन एवं एनआईसी द्वारा विकसित रिफॉर्मेटिव न्यूज मॉनिटरिंग सिस्टम (आरएनएमएस) पोर्टल की विस्तृत समीक्षा की गई। यह विशिष्ट पोर्टल समाचारों की निगरानी, विभागीय जवाबदेही तय करने तथा समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। एनआईसी के डीआईओ मिलिंद शर्मा ने उपस्थित अधिकारियों को पोर्टल का प्रशिक्षण देते हुए समाचारों पर कार्रवाई के उपरांत रिपोर्ट अपलोड करने की प्रक्रिया समझाई। जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक समाचार को गंभीरता से लेते हुए उस पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा विभागीय स्तर पर सकारात्मक सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाए।

वंदे गंगा अभियान को जनआंदोलन बनाने के निर्देश:
बैठक में राज्य सरकार द्वारा 25 मई से 5 जून तक चलने वाले वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान की भी विस्तृत समीक्षा की गई। सीईओ बृजमोहन बैरवा ने सभी विभागों को दायित्वों के बारे में बताया। कलक्टर ने कहा कि यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जल संरक्षण के प्रति सामाजिक चेतना का महाअभियान है। उन्होंने निर्देश दिए कि गंगा दशहरा पर प्रत्येक ग्राम में जल स्रोतों का पूजन करवाया जाए तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से घर-घर जाकर पीले चावल देकर आमंत्रण दिया जाए।
उन्होंने निर्देशित किया कि जल संग्रहण संरचनाओं पर जल पूजन, कलश यात्रा, स्वच्छता एवं जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएं। विभिन्न विभागों द्वारा निर्मित एवं प्रस्तावित जल संरचनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया जाए। भामाशाहों एवं उद्यमियों के सहयोग से पक्षियों के लिए परिण्डे बांधे जाएं तथा तुलसी के पौधों का वितरण करवाया जाए। अमृत सरोवर, तालाब, बावड़ियों एवं पारंपरिक जल स्रोतों की साफ-सफाई कर एकल उपयोग प्लास्टिक एवं जलकुंभी हटाने के निर्देश भी दिए गए।
कलक्टर ने ग्राम पंचायत एवं ब्लॉक स्तर के राजकीय परिसरों की साफ-सफाई, महापुरुषों की प्रतिमाओं के संरक्षण, पेयजल टंकियों की सफाई, खराब हैंडपंपों एवं पेयजल लाइनों की मरम्मत तथा विद्युत लाइनों के आसपास पेड़ों की छंटाई जैसे कार्यों को मिशन मोड में करने के निर्देश दिए। साथ ही मिशन हरियालो राजस्थान के तहत पौधारोपण के लिए गड्ढे खुदवाने, जल संरक्षण कार्यों को स्वीकृत करवाने तथा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई के प्रति किसानों को जागरूक करने के निर्देश भी प्रदान किए।
बैठक में धरती आबा अभियान एवं आदि कर्मयोगी अभियान की भी समीक्षा की गई तथा संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिला कलक्टर ने कहा कि सभी अभियान तभी सफल होंगे जब उनमें जनभागीदारी, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का समावेश होगा।
